तीन तलाक़ विधेयक 2019 संसद में पारित

ट्रिपल तलाक के अभिशाप से मुक्त महिलाएं|

ट्रिपल तलाक के अभिशाप से मुक्त महिलाएं|,भी देश में मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न से भरपूर गैर-कानूनी, असंवैधानिक, गैर-इस्लामी कुप्रथा ‘सियासी संरक्षण’ में फलता- फूलता रहा। ‘तीन तलाक’ कुप्रथा के खिलाफ कानून तो 1986 में भी बन सकता था जब शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया था। जबकि भारत संविधान से चलता है, किसी शरीयत या धार्मिक कानून या व्यवस्था से नहीं। इससे पहले भी देश में सती प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए भी कानून बनाये गए। तीन तलाक कानून का किसी मजहब, किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं था, शद्ध रूप से  यह कानून एक कुप्रथा, क्रूरता, सामाजिक बुराई और लैंगिक असमानता को खत्म करने के लिए पारित किया गया।

यह मुस्लिम महिलाओं के समानता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जड़ा हुआ विषय था। मौखिक रुप से तीन बार तलाक कह कर तलाक देना, पत्र, फोन, यहां तक की मैसेज, व्हाट्सएप के जरिये तलाक दिए जाने के मामले सामने आने लगे थे, जो कि किसी भी संवेदनशील देश-समावेशी सरकार के लिए अस्वीकार था। दुनिया के कई प्रमख इस्लामी देशों ने बहुत पहले हुई  ‘तीन तलाक’ को गैरकानूनी और गैर-इस्लामी घोषित कर खत्म कर दिया था। मिस्र दनुिया का पहला इस्लामी देश है जिसने 1929 में “तीन तलाक” को खत्म किया, गैर कानूनी एवं दंडनीय अपराध बनाया। 1929 में सूडान ने तीन तलाक पर प्रतिबन्ध लगाया। 1956 में पाकिस्तान ने, 1972 में बांग्लादेश, 1959 में इराक, सीरिया ने 1953 में, मलेशिया ने 1969 में इस पर रोक लगाई। इसके अलावा साइप्रस, जॉर्डन, अल्जीरिया, ईरान, ब्रूनेई, मोरक्को, कतर, यूएई जैसे इस्लामी देशों ने तीन तलाक खत्म किया और कड़े कानूनी प्रावधान बनाये। लेकिन भारत को मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा के अमानवीय जलु्म से आजादी दिलाने में लगभग 70 साल लग गए।भी देश में मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न से भरपूर गैर-कानूनी, असंवैधानिक, गैर-इस्लामी कुप्रथा ‘सियासी संरक्षण’ में फलता- फूलता रहा। ‘तीन तलाक’ कुप्रथा के खिलाफ कानून तो 1986 में भी बन सकता था | 

जब शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया था। जबकि भारत संविधान से चलता है, किसी शरीयत या धार्मिक कानून या व्यवस्था से नहीं। इससे पहले भी देश में सती प्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए भी कानून बनाये गए। तीन तलाक कानून का किसी मजहब, किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं था |

ट्रिपल तलाक के अभिशाप से मुक्त महिलाएं|
ट्रिपल तलाक के अभिशाप से मुक्त महिलाएं|

 

श्री अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक़ विधेयक 2019 पारित होने से मुस्लिम महिलाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खुलेंगे जिससे वे न्यू इंडिया के निर्माण में प्रभावी भूमिका अदा कर सकेंगी। उनका कहना था कि यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं की गरिमा को सुनिश्चित करने और उसे अक्षुण्‍ण रखने के लिए उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है।

भारत के संसदीय इतिहास में 1 अगस्त की तारीख अब मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ के रूप में दर्ज हो चकुी है। 1 अगस्त 2019

 

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