शैव धर्म UPSC

शैव धर्म

शिव तथा उनसे सम्बन्धित धर्म की प्राचीनता प्रागैतिहासिक युग तक जाती है। सैन्धव सभ्यता की खुदाई में मोहनजोदड़ो से एक मुद्रा पर पद्मासन में विराजमान एक योगी का चित्र मिलता है। उसके सिर पर त्रिशूल जैसा आभूषण तथा तीन मुख हैं। सर जॉन मार्शल ने इस देवता की पहचान ऐतिहासिक काल के शिव से स्थापित की है। अनेक स्थलों से कई शिवलिंग भी प्राप्त होते हैं। इससे सूचित होता है कि यह भारत का प्राचीनतम धर्म था।

शव धर्म की उत्पत्ति वैष्णव धर्म से भिन्न प्रकार के अति प्राचीन अतीत में निहित थी :-

⏩ पर्व वैदिक धर्म अर्थात हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण अवयव पशुपति महादेव की पूजा करना था |

⏩ शव मत उत्तर उपनिषद काल में उस समय सूस्पष्ट तौर पर प्रकट हुआ जब शिव की पहचान आतंकित करने वाले वैदिक देवता रुद्र के साथ की गई |

⏩ लिंग के रूप में शिव की व्यापक स्तर पर पूजा होती है |

⏩ कछ पुराणो ने संपूर्ण सृष्टि की पहचान शिव के साथ उसके 5 रूपो तत्पुरुष , नामदेव , अघोरेश , साधोजात एवं ईशान की अवधारणा के माध्यम से की है |

⏩ शिव के 5 रूपों को 5 दिशाओं का शासक बताया गया है जिसमें पाताल और अकाश के चार बिंदु शामिल है और यह स्थलीय विस्तार की पूर्णता को निश्चित करता है |

⏩ शवमत के भावनात्मक पक्ष का प्रचार नायनारों द्वारा किया गया था जबकि उसके सैद्धांतिक पक्ष को शैव बुद्धिजीवियों ने पूर्ण किया ये आचार्य अगमनत , शुद्ध तथा वीरशैव जैसे शैव आंदोलन के रूपों से संबंधित थे |

⏩ अघोर शिवाचार्य उनका सबसे योग्य सिद्धांतकार था |

⏩ शद्ध शैववादियो ने रामानुज की शिक्षाओं को अपनाया और श्रीकांत शिवाचार्य उनका महान व्याख्याकार था |

⏩ मत्स्य पुराण में लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मिलता है |

⏩ शिव धर्म के विकास की प्रक्रिया में कुछ संप्रदायों – पशुपति , कापालिक , कालामुख , लिंगायत आदि का विकास हुआ |

⏩ इसका वर्णन वामन पुराण में मिलता है |

⏩ कापालिक संप्रदाय के इष्टदेव भैरव थे जिसका प्रमुख केंद्र श्रीशैल नामक स्थान था |

⏩ कालामुख संप्रदाय के लोगों को महाव्रतधर कहा जाता है इस संप्रदाय के लोग नर कपाल में ही भोजन , जल तथा सूरापान करते हैं और साथ ही अपने शरीर पर चिता की भस्म मलते हैं |

⏩ लिंगायत को जंगम या वीरशैव संप्रदाय भी कहा जाता है यह दक्षिण भारत में प्रचलित था इस संप्रदाय के प्रवर्तक अल्लभ प्रभु और इनके शिष्य बासव थे |

⏩ वीरशैववादियों का नेतृत्व बासव द्वारा किया गया |

⏩ पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश थे जिसको शिव का अवतार माना जाता है इनके द्वारा रचित मुख्य ग्रंथ पाशुपत सूत्र है |

⏩ अथर्ववेद में शिव को शर्व , भव , पशुपति तथा भूपति कहा गया है |

⏩ नाथ संप्रदाय की स्थापना मत्स्येंद्रनाथ ने की थी इसके प्रमुख प्रचारक बाबा गोरखनाथ थे |

⏩ दक्षिण भारत में शैव धर्म के चालुक्य , राष्ट्रकूट , पल्लव एवं चोलों के समय लोकप्रिय रहा |

⏩ कषाण शासकों की मुद्राओं पर शिव एवं नंदी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है |

⏩ तमिल शैवमत की शिक्षाओं को प्रथम बार व्यवस्थित करने वाला मेयकानतर था|

⏩ शक्ति संप्रदाय या देवी की पूजा का उल्लेख महाभारत से प्राप्त होता है |

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