About Course

जो किसी कंप्यूटर को कसी organization को कम्पूटरी Attack से किसी कंप्यूटर को बचाते है एथिकल हैकर कहते है |एथिकल हैकर नै किसी organization को बल्कि देश को सुरक्षित करने में भी सहयोग देते है |

इस कोर्स को शुरू करने से पहले मै आपको कुछ बताना चाहूंगा कि आप यहां एक एथिकल हैकिंग के बारे में जानोंगे जो की किसी आवस्यक Work के लिए किया जाता है |अगर आप इसे किसी गैरकानूनी काम के लिए करते है तो आपको जेल और सजा हो सकती है जिसके आप खुद जिम्मेदार होंगे

What Will You Learn?

  • Process flow for Ethical Hacking
  • Ethical Hacking Techniques
  • Learn Ethical Hacking From Beginning In Hindi
  • Ethical Hacking
  • Cybersecurity
  • Bug Hunting
  • Pen Testing

Course Content

Other Hacking Types
White hat hacker- व्हाइट हैट हैकर्स को एथिकल हैकर्स के रूप में भी जाना जाता है। वे कभी भी किसी System को नुकसान नहीं पहुंचते हैं, बल्कि वे penetration testing and vulnerability assessments के एक भाग के रूप में कंप्यूटर या नेटवर्क System में कमजोरियों का पता लगाने की कोशिश करते हैं। एथिकल हैकिंग illegal नहीं है और यह IT industry में उपलब्ध मांग वाले नौकरियों में से एक है। कई कंपनियां हैं जो penetration testing and vulnerability assessments के लिए ethical hacker को hire करती है

  • 06:52
  • Lesson-2 Types of hacking attack
    24:53
  • Lesson-3 Networking Essentials -NE 1
    27:32
  • Lesson-4 PAN- NE 2
    08:41
  • Lesson-5 Tcp ip protocol stack
    26:20
  • Lesson-6 What is IP
    26:20
  • What are the types of ethical hackers?
  • Topic 1 Test

Networking For ethical hacking
History of IP Address वर्तमान समय मे इंटरनेट की इस दुनिया मे दो IP Address का इस्तेमाल किया जाता है. IPv4 और IPv6. IP Address का मूल संस्करण 1983 में Arpanet द्वारा विकसित किया गया. IPv4 Address 32 बिट का होता है. जिसमें 4,297,967,296 एड्रेस स्पेस सीमित होता है. IPv4 में कुछ एड्रेस विशेष कार्यों के लिए Private Network (18 मिलियन और एक 1M= 10, 00,000) तथा Multicast Addressing (270 मिलियन एड्रेस) आरक्षित (Reserved) हैं. आमतौर पर IPv4 Dot-Decimal Notation के रूप में Present किया जाता है. जिसमें 4 गणीतिय अंक होते हैं, तथा प्रत्येक Range 0-255 तक बिंदुओ के रूप में विभाजित होता है. प्रत्येक भाग 8 Bits (Octet) का बना होता है. इंटरनेट प्रोटोकॉल के शुरुवाती दौर में नेटवर्क नंबर संख्या अधिकतम आठ होती थी. जिस विधि से केवल 256 नेटवर्क की अनुमति होती थी. परन्तु जल्द ही 1981 इस समस्या के समाधान के लिए स्वतंत्र तथा आधुनिक नेटवर्क IPv4 तैयार किया गया जो वर्तमान में भी उपयोग किया जाता है. परंतु समय के साथ बढ़ते इंटरनेट यूजर्स के कारण उपलब्ध IP Address में कमी के कारण 1995 में IP Address में 132 उपयोग कर नया डिज़ाइन दिया गया जिस सिस्टम को इंटरनेट प्रोटोकॉल 6 के नाम से जाना गया. IPv6 तकनीक को वर्ष 2000 तक विभिन्न Testing प्रक्रिया के दौर से गुजारा गया. जब कमर्शियल उत्पादन की शुरुआत हुई. वर्तमान समय में IPv4 तथा IPv6 दोनों का आधुनिक डिवाइस में उपयोग किया जाता है. दोनों IP Versions में तकनीकी बदलाव के कारण IP Address Formation में विभिन्नता देखी जा सकती है. IPv4 तथा IPv6 के बीच IPv5 1979 के Experiment Internet Protocol Stream पर आधारित था. हालांकि IPv5 को कभी भी लॉन्च नही किया गया.

Student Ratings & Reviews

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Free
Free access this course
Enrolment validity: Lifetime

Material Includes

  • Online video content
  • Certificate of completion
  • Instructor Q&A
  • Instructor direct message

Requirements

  • Basic Computer Knowledge
  • And Fast Internet

Audience

  • Ethical Hacking
  • Cyber Security
  • Pen Testing Course
  • Best Ethical Hacking Course For Beginner In Hindi
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  • Beginner Python
  • Python

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