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Other Hacking Types
White hat hacker- व्हाइट हैट हैकर्स को एथिकल हैकर्स के रूप में भी जाना जाता है। वे कभी भी किसी System को नुकसान नहीं पहुंचते हैं, बल्कि वे penetration testing and vulnerability assessments के एक भाग के रूप में कंप्यूटर या नेटवर्क System में कमजोरियों का पता लगाने की कोशिश करते हैं। एथिकल हैकिंग illegal नहीं है और यह IT industry में उपलब्ध मांग वाले नौकरियों में से एक है। कई कंपनियां हैं जो penetration testing and vulnerability assessments के लिए ethical hacker को hire करती है
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Networking For ethical hacking
History of IP Address वर्तमान समय मे इंटरनेट की इस दुनिया मे दो IP Address का इस्तेमाल किया जाता है. IPv4 और IPv6. IP Address का मूल संस्करण 1983 में Arpanet द्वारा विकसित किया गया. IPv4 Address 32 बिट का होता है. जिसमें 4,297,967,296 एड्रेस स्पेस सीमित होता है. IPv4 में कुछ एड्रेस विशेष कार्यों के लिए Private Network (18 मिलियन और एक 1M= 10, 00,000) तथा Multicast Addressing (270 मिलियन एड्रेस) आरक्षित (Reserved) हैं. आमतौर पर IPv4 Dot-Decimal Notation के रूप में Present किया जाता है. जिसमें 4 गणीतिय अंक होते हैं, तथा प्रत्येक Range 0-255 तक बिंदुओ के रूप में विभाजित होता है. प्रत्येक भाग 8 Bits (Octet) का बना होता है. इंटरनेट प्रोटोकॉल के शुरुवाती दौर में नेटवर्क नंबर संख्या अधिकतम आठ होती थी. जिस विधि से केवल 256 नेटवर्क की अनुमति होती थी. परन्तु जल्द ही 1981 इस समस्या के समाधान के लिए स्वतंत्र तथा आधुनिक नेटवर्क IPv4 तैयार किया गया जो वर्तमान में भी उपयोग किया जाता है. परंतु समय के साथ बढ़ते इंटरनेट यूजर्स के कारण उपलब्ध IP Address में कमी के कारण 1995 में IP Address में 132 उपयोग कर नया डिज़ाइन दिया गया जिस सिस्टम को इंटरनेट प्रोटोकॉल 6 के नाम से जाना गया. IPv6 तकनीक को वर्ष 2000 तक विभिन्न Testing प्रक्रिया के दौर से गुजारा गया. जब कमर्शियल उत्पादन की शुरुआत हुई. वर्तमान समय में IPv4 तथा IPv6 दोनों का आधुनिक डिवाइस में उपयोग किया जाता है. दोनों IP Versions में तकनीकी बदलाव के कारण IP Address Formation में विभिन्नता देखी जा सकती है. IPv4 तथा IPv6 के बीच IPv5 1979 के Experiment Internet Protocol Stream पर आधारित था. हालांकि IPv5 को कभी भी लॉन्च नही किया गया.
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Ethical Hacking course for beginner in Hindi
About Lesson

subnetting

subnetting एक ऐसी विधि है जिसमें एक बड़े नेटवर्क को दो या दो से अधिक छोटे लॉजिकल नेटवर्कों में विभाजित कर दिया जाता है. इन छोटे नेटवर्कों को subnetwork या subnet कहा जाता है. इन subnetwork या subnet का अपना अलग-अलग एड्रेस होता है. इन छोटे नेटवर्कों को बनाने के लिए subnet mask का प्रयोग किया जाता है. subnet mask को IP एड्रेस में network address तथा host address के बीच differentiate (अंतर) करने के लिए किया जाता है. subnet mask का केवल एक ही मुख्य उद्देश्य होता है यह identify करना कि IP address का कौन सा भाग network address है और कौन सा भाग host address.

why use subnetting? (subnetting की जरुरत क्यों पड़ी?)

इसकी जरुरत इसलिए पड़ी क्योंकि जब इन्टरनेट popular हुआ तो सभी IP एड्रेस consume होने वाले थे. अर्थात् उस समय IP एड्रेस की shortage (कमी) हो गयी थी. जिससे इन्टरनेट का भविष्य खतरे में था और यह खत्म हो जाता. इसी परेशानी से बचने के लिए subnetting को बनाया गया.

advantage of subnetting in hindi (इसके फायदे):-

इसके फायदे निम्नलिखित है:- 1:- इसमें नेटवर्क की security बेहतर होती है क्योंकि हम प्रत्येक subnet को मैनेज कर सकते है. 2:- नेटवर्क छोटे होने से collision डोमेन और ब्रॉडकास्ट डोमेन भी छोटे हो जाते है. जिससे ट्रैफिक और ब्रेकडाउन की समस्या में कमी आती है. 3:- इसमें administrative control बेहतर हो जाता है क्योंकि बड़े नेटवर्क की तुलना में छोटे नेटवर्क को मैनेज तथा administrate करना आसान होता है | 4:- इसमें हम एक ही नेटवर्क में दो या दो से अधिक LAN technology का प्रयोग कर सकते है. 5:- subnetting इन्टरनेट में IP addresses की समस्या को solve करने में बहुत ही सहायक होते है. 6:- subnets इन्टरनेट में routing tables के size को minimize करता है.

disadvantage of subnetting in hindi

1:- यह बहुत ही expensive होता है क्योंकि इसमें routers, switches, hubs, bridge आदि networking devices का प्रयोग किया जाता है जो कि बहुत महंगे होते है. 2:- इसमें subnets को मैनेज करने के लिए experienced administrative की जरुरत होती है.

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