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  • संज्ञा और संज्ञा के भेद
  • सर्वनाम और सर्वनाम के भेद

संज्ञा की परिभाषा (sangya definition in hindi)

किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव, अवस्था, गुण या दशा के नाम को संज्ञा (Noun) कहते हैं। वस्तु से किसी पदार्थ का भाव ही नहीं, उनके धर्म(स्वभाव) को सूचित करने वाले शब्द भी ‘संज्ञा’ होते है। जैसे – मनुष्य (जाति), अमेरिका, भारत (स्थान), बचपन, मिठास(भाव), किताब, टेबल(वस्तु) आदि।

संज्ञा के भेद (sangya ke bhed in hindi)

संज्ञा के पांच भेद होते हैं:
  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. भाववाचक संज्ञा
  3. जातिवाचक संज्ञा
  4. द्रव्यवाचक संज्ञा
  5. समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु, स्थान तथा प्राणी के नाम का बोध कराते हैं, उन्हें व्यक्ति वाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- मोहन, राजेश, दिनेश, कमल, जयपुर, ताजमहल, रामायण, चेतक, गंगा, हिमालय इत्यादि। व्यक्तिवाचक संज्ञा, ‘विशेष’ बोध कराती है ‘सामान्य’ का नहीं।व्यक्तिवाचक संज्ञा में सम्मिलित शब्द निम्न हैं-
  1. स्त्री- पुरुषों के नाम – राधा, गोविंद, रमेश, पार्वती आदि।
  2. देवी-देवताओं के नाम – शिव, विष्णु, पार्वती, लक्ष्मी आदि।
  3. देशों के नाम – भारत, पाकिस्तान, चीन, नेपाल आदि।
  4. राज्यों के नाम – राजस्थान, गुजरात, पंजाब आदि।
  5. खाड़ी एवं झीलों के नाम – बंगाल की खाड़ी, नक्की झील आदि।
  6. महाद्वीप के नाम – एशिया, यूरोप आदि।
  7. एतिहासिक दरवाजे एवं खिड़कियों के नाम – इंडिया गेट, अजमेरी गेट, सांगानेरी गेट, बीचली खिड़की आदि।
  8. दुर्ग एवं किलो के नाम – रणथम्भौर दुर्ग, चित्तौड़ दुर्ग, चुरू का किला आदि।
  9. भाषाओं के नाम – हिंदी, अंग्रेजी, मराठी आदि।
  10. उपाधि एवं पुरस्कारों के नाम – डॉक्टर सर, गार्गी, अर्जुन आदि।
  11. सरकारी योजनाओं के नाम – जन – धन योजना आदि।
  12. खेलों के नाम – क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल आदि।
  13. जिले, तहसील, गाँव के नाम – जयपुर, टोंक, मालपुरा आदि।
  14. पठार एवं मैदानों के नाम – हाड़ौती का पठार, छप्पन का मैदान आदि।
  15. दिशाओं के नाम – पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण आदि।
  16. नदियों के नाम – गंगा, यमुना, चम्बल आदि।
  17. पहाड़ों के नाम – अरावली, हिमालय आदि।
  18. समाचार पत्रों के नाम – दैनिक भास्कर, पत्रिका आदि।
  19. चौकों के नाम – चाँदनी चौक आदि।
  20. त्योहारों के नाम – दीपावली, होली आदि।
  21. ऐतिहासिक युद्धो के नाम – बक्सर का युद्ध, हल्दीघाटी का युद्ध

व्यक्तिवाचक संज्ञा के उदाहरण

  • रमेश बाहर खेल रहा है।
  • महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट खेलते हैं।
  • मैं भारत में रहता हूँ।
  • महाभारत एक महान ग्रन्थ है।
  • अमिताभ बच्चन कलाकार हैं।
  • अंग्रेजी दुनिया में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है।
ऊपर दिए गए वाक्यों में रमेशमहेंद्र सिंह धोनीभारतमहाभारत, व अमिताभ बच्चन संज्ञा शब्द कहलायेंगे क्योंकि ये शब्द किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं।

२.जातिवाचक संज्ञा (jati vachak sangya in hindi)

जिन संज्ञा शब्द से किसी जाती (वर्ग) के सम्पूर्ण प्राणियों, वस्तुओं, स्थानों, आदि का बोध होता है, उसे ‘जातिवाचक संज्ञा (Common noun in Hindi)’ कहते है।(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});प्राय: जाति वाचक संज्ञा में वस्तुओ, पशु-पक्षिओ, फल-फूल, धातुओं, व्यवसाय सम्बन्धी व्यक्तियों, नगर, शहर, गाँव, परिवार, भीड़ जैसे बहुवाची शब्दों के नाम आते है।जातिवाचक संज्ञा में सम्मिलित शब्द निम्न हैं-
  • पशु पक्षियों के नाम – तोता, चिड़िया, कबूतर आदि।
  • पेड़ो एवं फलों के नाम – आम, पपीता, केला, पीपल आदि।
  • दैनिक उपयोगी वस्तुएँ – कुर्सी, घड़ी, कलम आदि।
  • प्राकृतिक आपदाओं के नाम – आँधी, तुफान आदि।
  • शरीर के अंगो के नाम – नाक, कान आदि।
  • सामाजिक संबंधो के नाम – भाई, बहन आदि।
  • पदों के नाम – मंत्री, प्रोफेसर आदि।
  • संपूर्ण वर्ग या जाति का नाम – नगर, देश, पहाड़ आदि।
विशेष-
विशेष अर्थ में एवं तुलनात्मक प्रयोग होने पर जातिवाचक अथवा अन्य संज्ञाएं व्यक्तिवाचक में बदल जाती है। गोसाई – गायों का स्वामी (जातिवाचक), तुलसीदास (व्यक्तिवाचक)बहुव्रीहि समास के उदाहरण व्यक्तिवाचक संज्ञा हैं- गाय – जातिवाचक संज्ञा गोरा गाय – व्यक्तिवाचक संज्ञा। घोड़ा – जातिवाचक संज्ञा चेतक घोड़ा – व्यक्तिवाचक संज्ञा

जातिवाचक संज्ञा के अन्य उदाहरण (jati vachak sangya examples in hindi)

  • स्कूल में बच्चे पढ़ते हैं।
  • बिल्ली चूहे खाती है।
  • पेड़ों पर पक्षी बैठे हैं
  • हिरन का शेर शिकार करते हैं।
  • सड़क पर गाड़ियां चलती हैं।
  • सभी प्रजातियों में से मनुष्य सबसे बुद्धिमान हैं।
ऊपर दिए गए वाक्यों में बच्चेचूहेपक्षी,हिरन, गाड़ियां एवं प्रजाति आदि जातिवाचक संज्ञा शब्द कहलायेंगे क्योंकि ये किसी विशेष बच्चे या पक्षी का बोध न कराकर सभी बच्चो व पक्षियों का बोध करा रहे हैं।

जातिवाचक संज्ञा के उपभेद –

(i) समूहवाचक/समुदायवाचक संज्ञा 

Samuh Vachak Sangya Ki Paribhasha :-जिस संज्ञा शब्द से किसी झुंड, समूह या समुदाय का बोध हों, उसे समुहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- पुलिस, संघ, सेना, झुण्ड, वर्ग, परिवार, गुलदस्ता, दरबार, समिति, आयोग, कुंज, आगार इत्यादि।
समूह वाचक संज्ञा के उदाहरण (Samuh Vachak Sangya examples in Hindi)जैसे – प्राणियों का समूह (सजीव) सभा, दल, गिरोह, झुण्ड,परिवार आदि। पदार्थों का समूह (निर्जीव) ढ़ेर, गुच्छा गट्‌ठर आदि।
  • बहुत से छात्र गांव से है।
  • भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेना है।
  • जगल में मौर का एक झुण्ड है।

(ii) द्रव्यवाचक संज्ञा 

द्रव्यवाचक संज्ञा की परिभाषा :-किसी धातु, पदार्थ, द्रव आदि का बोध हो, द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाती है; जैसे- लोहा, सोना, चाँदी, तेल, घी, पानी, दूध, चीनी, अन्न आदि। अन्य परिभाषा – नापतौल के पदार्थों अथवा वस्तुओं का बोध कराने वाली संज्ञा, द्रव्यवाची संज्ञा होती है। जैसे – धातु व खनिज पदार्थ – सोना, चाँदी, ताँबा, डीजल,पेट्रोल आदि। – खाद्य पदार्थ – दूध, दही, छाछ आदि।

3.भाववाचक संज्ञा

जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास आदि।

भाववाचक संज्ञा के उदाहरण

  • ज्यादा दोड़ने से मुझे थकान हो जाती है।
  • लगातार परिश्रम करने से सफलता मिलेगी।
  • तुम्हारी  आवाज़ में बहुत मिठास है।
  • मुझे तुम्हारी आँखों में क्रोध नज़र आता है।
  • लोहा एक कठोर पदार्थ है।
ऊपर दिए गए वाक्यों में थकान से थकने का भाव व सफलता से सफल होने का भाव, मिठास से मीठे होने का एवं क्रोध से क्रोधित होने का भाव व्यक्त हो रहा है इसलिए ये भाववाचक संज्ञा शब्द हैं।भाववाचक संज्ञा की रचना मुख्य पांच प्रकार के शब्दों से होती है- (1) जातिवाचक संज्ञा से (2) सर्वनाम से (3) विशेषण से (4) क्रिया से (5) अवयव सेजातिवाचक संज्ञा से :-
जातिवाचक संज्ञाभाववाचक संज्ञा
शिशुशैशव, शिशुता
विद्वान्विदवता
मित्रमित्रता
पुरुषपुरुषत्व
सतीसतीत्व
लड़कालड़कपन
बच्चाबचपन
इंसानइंसानियत
दानवदानवता
बूढ़ाबुढ़ापा
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सर्वनाम से :-
सर्वनामभाववाचक संज्ञा
ममममता
स्वस्वत्व
आपआपा
सर्वसर्वस्व
निजनिजत्व
अपनाअपनापन / अपनत्व
विशेषण से :-
विशेषणभाववाचक संज्ञा
कठोरकठोरता
विधवावैधव्य
चालाकचालाकी
शिष्टशिष्टता
नम्रनम्रता
मोटामोटापा
मीठामिठास
सरलसरलता
चतुरचतुराई
सहायकसहायता
Learn hindi- kamaldnp
क्रिया से :-
क्रियाभाववाचक संज्ञा
सुननासुनवाई
गिरनागिरावट
चलनाचाल
कमानाकमाई
बैठनाबैठक
पहचाननापहचान
खेलनाखेल
जीनाजीवन
चमकनाचमक
लिखनालिखावट
अव्यय से :-
अव्ययभाव वाचक संज्ञा
दूरदुरी
ऊपरऊपरी
धिक्धिक्कार
शीघ्रशीघ्रता
मनामनाही
निकटनिकटता
निचेनिचाई
समीपसामीप्य

4. द्रव्यवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी धातु या द्रव्य का बोध करते हैं, द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं।  जैसे- कोयला, पानी, तेल, घी आदि।

द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण 

  • मेरे पास सोने के आभूषण हैं।
  • एक किलो तेल लेकर आओ।
  • मुझे दाल पसंद है।
  • मुझे चांदी के आभूषण बहुत पसंद हैं।
  • लोहा एक कठोर  है।
  • दूध पीने से ताकत बढ़ती है।
ऊपर दिए गए वाक्यों में सोनेतेल और दाल शब्दों से किसी द्रव्य का बोध हो रहा है इसलिए ये द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं।

5. समुदायवाचक संज्ञा

जिन संज्ञा शब्दों से किसी भी व्यक्ति या वस्तु के समूह का बोध होता है, उन शब्दों को समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- भीड़, पुस्तकालय, झुंड, सेना आदि।

समुदायवाचक संज्ञा के उदाहरण 

  • भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेना है।
  • कल बस स्टैंड पर भीड़ जमा हो गयी।
  • मेरे परिवार में चार सदस्य हैं।
  • हाथी हमेशा झुण्ड में सफर करते हैं।
  • कालेधन पर शुरू होते ही सभा में सन्नाटा छा गया।
ऊपर दिए गए वाक्यों में सेनाभीड़ व परिवार एक समूह का बोध करा रहे हैं इसलिए ये समुदायवाचक संज्ञा कहलायेंगे। 

संज्ञा के बार-बार प्रयोग को रोकने के लिए उसके स्थान पर जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें सर्वनाम (pronoun) कहते हैं। अर्थात जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है, वे सर्वनाम (sarvnam) कहलाते हैं। कामता प्रसाद गुरु के शब्दों में- “सर्वनाम उस विकारी शब्द को कहते हैं, जो पूर्वापरसंबंध से किसी भी संज्ञा के बदले आता है।”[1] संज्ञा से जहाँ उसी वस्तु का बोध होता है, जिसका वह (संज्ञा) नाम है, जैसे गाय कहने से केवल गाय का बोध होता है, बैल, भैंस, बकरी, पेड़ आदि का नहीं। परंतु ‘वह’, ‘यह’ आदि कहने पर पूर्वापरसंबंध के अनुसार ही किसी वस्तु का बोध होता है। जैसे-

(क) रमेश ने कहा की मैं बीमार हूँ। (‘रमेश’ के स्थान पर ‘मैं’)

(ख) सभी लोगों ने कहा कि हम तैयार हैं। (‘लोगों’ के स्थान पर ‘हम’)

(ग) राधा ने कृष्ण से पूछा कि तुम कब जाओगे। (‘कृष्ण’ के स्थान पर ‘तुम’)

(घ) रोटी मत खाओ, क्योंकि वह जली है। (‘रोटी’ के स्थान पर ‘वह’)

उपरोक्त वाक्यों में मैं, हम, तुम, वह सर्वनाम हैं।

सर्वनाम के भेद – Sarvanam Ke Bhed in Hindi

हिंदी में कुल ग्यारह सर्वनाम हैं- मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या। अर्थ की दृष्टि से सर्वनाम के छह भेद होते हैं-

1 . पुरुषवाचक सर्वनाम

2 . निश्चयवाचक सर्वनाम

3 . अनिश्चयवाचक सर्वनाम

4 . संबंधवाचक सर्वनाम

5 . प्रश्नवाचक सर्वनाम

6 . निजवाचक सर्वनाम

1 . पुरुषवाचक सर्वनाम

“पुरुषवाचक सर्वनाम पुरुषों (स्त्री या पुरुष) के नाम के बदले आते हैं।” जो सर्वनाम बोलनेवाले, सुननेवाले और किसी दूसरे व्यक्ति या पदार्थ का बोध कराते हैं, उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं।

जैसे- मैं, तू और वह पढ़ेंगे।

पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद

पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं-

(a) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम |

(b) मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम |

(c) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम |

(a) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम |

बोलनेवाले या लिखनेवाले के नाम के बदले जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैं, हम, मुझको, मैंने, मुझे आदि। यद्यपि ‘हम’ शब्द बहुवचन है लेकिन इसका प्रयोग एकवचन के रूप में भी किया जाता है।

उदाहरण-

(क) मैं घर जाऊँगा।

(ख) हम भगवान को नहीं देख सकते।

(ग) यह निबंध मैंने लिखा है।

(घ) मुझे सिनेमा देखना नहीं पसंद।

b) मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम

बात सुननेवाले (श्रोता) के नाम के बदले जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- तू, तुम, तुम्हें, आप, तुम्हारा, तेरा आदि।

उदाहरण-

(ख) तुम अब बोल सकती हो।

(ग) तुम्हें कुछ कहना बेकार है।

(घ) आप मेरे गुरु हैं।

(ड़) तुम्हारा घर बहुत दूर है।

(च) तेरा बैग बहुत भारी है।

मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम संबंधी अन्य तथ्य

(i) प्रायः बातचीत में मध्यम पुरुषवाचक सर्वनामों का बहुवचन में ही प्रयोग किया जाता है। जैसे- तुम यहाँ अकेले मत ठहरो।

(ii) ‘तू’ शब्द का एक वचन में प्रयोग या तो अपने से बहुत छोटों के लिए किया जाता है या किसी का निरादर करने के लिए। जैसे-

(क) मैं तुझे अभी बाहर का रास्ता दिखाता हूँ।

(ख) बेटा! तू यहीं रुक। मैं तेरे लिए बिस्किट लेते आऊंगा।

(iii) ‘तू’ शब्द का प्रयोग बहुत अधिक घनिष्ठता, अपनापन या श्रद्धा जताने के लिए भी किया जाता है। जैसे-

(क) तू तो मेरे भाई जैसा है, तब तू इतना क्यों लजा रहा।

(ख) हे भगवान्! तू ही हमारा रक्षक है।

(iv) ‘आप’ शब्द का प्रयोग किसी को आदर या सम्मान देने के लिए किया जाता है। जैसे-

(क) आप हमारे लिए भगवान हैं।

(ख) आप हमारे पूज्य हैं।

c) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किसी अन्य व्यक्ति के लिए किया जाता है, उन्हें अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। अर्थात उत्तम पुरुष और मध्यम पुरुष को छोड़कर अन्य सब संज्ञाओं के बदले जो सर्वनाम प्रयुक्त होते हैं, उन्हें अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं।

जैसे- यह, वह, वे, ये, इनका, इन्हें, उसे, उन्होंने, इनसे, उनसे आदि।

उदाहरण-

(क) वह कल खेलने नहीं आया था।

(ख) वे नहीं आयेंगे।

(ग) उन्होंने वादा किया है।

(घ) उसे कल बुला लेना।

(ड़) उन्हें जाने दो।

(च) इनसे कहिए कि मुझे परेशान न किया करें।

निश्चयवाचक सर्वनाम (demonstrative pronoun)

“जो सर्वनाम पास की या दूर की किसी खास वस्तु की ओर संकेत करते हैं, उन्हें निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।” दूसरे शब्दों में- सर्वनाम के जिस रूप से हमें किसी बात या वस्तु का निश्चत रूप से बोध होता है, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह, वह आदि।

उदाहरण-

(क) यह कोई नया काम नहीं है।

(ख) रोटी मत खाओ, क्योंकि वह जली है।

निश्चयवाचक सर्वनाम के भेद

निश्चयवाचक सर्वनाम दो प्रकार का होता है- दूरवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम और निकटवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम।

(a) दूरवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम

जो शब्द दूर वाली वस्तुओं की ओर निश्चित रूप से संकेत करते हैं उन्हें दूरवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। ‘वह’ दूर के पदार्थ की ओर संकेत करता है, इसलिए इसे दूरवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- वह मेरी पैन है। वे किताब हैं। इसमें वह और वे दूर वाली वस्तुओं का बोध करा रहे हैं।

b) निकटवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम

जो शब्द निकट या पास वाली वस्तुओं का निश्चित रूप से बोध कराये उन्हें निकटवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। ‘यह’ निकट के पदार्थ की ओर संकेत करता है, इसलिए इसे निकटवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह मेरी पैन है। ये मुझे बहुत पसंद है। इसमें यह और ये निकट वाली वस्तु का बोध करा रही है।

निश्चयवाचक सर्वनाम संबंधी अन्य तथ्य

(a) दो संज्ञाओं में से पहली के लिए ‘यह’ और दूसरी के लिए ‘वह’ का प्रयोग किया जाता है। जैसे- कोयल और कौए में यही भेद है कि यह मधुर बोलता है और वह कुवचन।

(b) ‘यह’ शब्द कभी-कभी वाक्य या वाक्यांश की ओर भी संकेत करता है। जैसे- जन-मन-गन—यह हमारा राष्ट्रीय गीत है।

(c) ‘वह’ का पुराना रूप ‘सो’ है, इसका प्रयोग आज भी कभी-कभी होता है।

अनिश्चयवाचक सर्वनाम (indefinite pronoun)

“जिस सर्वनाम से किसी निश्चित वस्तु का बोध न हो, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।”[4] अर्थात जो सर्वनाम ऐसे व्यक्ति या पदार्थ का बोध कराये जिसका निश्चय न हो पाये। जैसे- कोई, कुछ आदि। सब कोई, हर कोई, कोई और, सब कुछ, कुछ का कुछ आदि भी अनिश्चयवाचक प्रयोग हैं।

उदाहरण-

(क) कोई आया था

(ख) ऐसा न हो कि कोई आ जाए।

(ग) बैग में कुछ नहीं है।

(घ) उसने कुछ नहीं खाया।

(ड़) कई ईश्वर तक को नहीं मानते।

(च) हर कोई जल्दबाजी में ही रहता है।

प्रश्नवाचक सर्वनाम (interrogative pronoun)

“जिस सर्वनाम से प्रश्न का बोध होता है उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं।”[5] दूसरे शब्दों में- जिन सर्वनामों का प्रयोग प्रश्न करने के लिए होता है, उन्हें प्रश्रवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- कौन, क्या आदि।उदाहरण-

(क) कौन है दरवाजे पर?

(ख) कौन आया था?

(ग) तुम क्या खा रहे हो?

(घ) क्या चाहते हो?

(ड़) तुम क्या लाये हो?

‘कौन’ और ‘क्या’ में विशेष अंतर यह है कि ‘कौन’ का प्रयोग प्राय: प्राणियों या चेतन जीवों के लिए और ‘क्या’ का प्रयोग जड़ पदार्थों या भाववाचक संज्ञाओं के लिए होता है। जब ‘क्या’ का अर्थ आश्चर्य या अन्यवचन आदि के लिए हो तब यह सर्वनाम न रहकर क्रियाविशेषण बन जाता है। जैसे-(क) क्या कहने तुम्हारे! 

(ख) मैं उसे समझाता ही क्या हूँ?

(ग) क्या गोरे क्या काले सबको एक दिन मरना है। (यहाँ ‘क्या’ समुच्चयबोधक है।)

(घ) स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत क्या से क्या हो गया! (यहाँ ‘क्या’ वाक्यांश के रूप में आया है।)

5.संबंधवाचक सर्वनाम (relative pronoun)

जिन शब्दों से दो पदों के बीच के संबंध का पता चले उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। वशुदेवनंदन प्रसाद के शब्दों में, “ जिस सर्वनाम से वाक्य में किसी दूसरे सर्वनाम से संबंध स्थापित किया जाए, उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं।”[6] जैसे- जो, सो आदि।

उदाहरण-

(क) जो जागत है सो पावत है।

(ख) वह जो न करे, सो थोड़ा।

(ग) वह कौन है, जो पड़ा रो रहा।

कभी-कभी संबंधवाचक सर्वनाम की कल्पना करनी पड़ती है, उसका प्रयोग हुआ दिखाई नहीं देता। जैसे-(क) गया सो गया। (ख) हुआ सो हुआ। उपरोक्त वाक्यों में ‘जो’ शब्द का प्रयोग हुआ नहीं है, उसकी कल्पना करनी पड़ती है।

6.निजवाचक सर्वनाम (reflexive pronoun)

‘निज’ का अर्थ होता है- अपना और ‘वाचक’ का अर्थ होता है- बोध (ज्ञान) कराने वाला अर्थात ‘निजवाचक’ का अर्थ हुआ- अपनेपन का बोध कराना। इस प्रकार, ‘स्वंय’ अर्थ का बोध कराने वाले सर्वनाम को निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- आप।

उदाहरण-(क) हम आप कर लेंगे।

(ख) तुम आप देख लोगे।

(ग) मैं आप ही चलता हूँ कि सबसे अलग रहूँ।

(घ) यह आप ही आप बकता जा रहा है, इसे किस ने बुलाया।

उपरोक्त वाक्यों में पहले आई हुई संज्ञा या सर्वनाम की चर्चा करने के लिए उसी वाक्य में ‘आप’ सर्वनाम आया है। पुरुषवाचक के अन्य पुरुषवाचक वाले ‘आप’ से इसका प्रयोग भिन्न है। यह कर्ता का बोधक है, पर स्वयं कर्ता का काम नहीं करता। वहीं पुरुषवाचक ‘आप’ बहुवचन में आदर के लिए प्रयुक्त होता है। जैसे- (क) आप मेरे सिर-आखों पर है। (आदरसूचक) (ख) मैं आप ही आ जाऊँगा। (निजवाचक)

निजवाचक सर्वनाम ‘आप’ का प्रयोग निम्नलिखित अर्थो में होता है- (a) निजवाचक ‘आप’ का प्रयोग किसी संज्ञा या सर्वनाम के अवधारण (निश्चय) के लिए होता है। जैसे- मैं आप वहीं से आया हूँ, मैं आप वही कार्य कर रहा हूँ। (b) निजवाचक ‘आप’ का प्रयोग दूसरे व्यक्ति के निराकरण के लिए भी होता है। जैसे- उन्होंने मुझे रहने को कहा और ‘आप’ चलते बने, वह औरों को नहीं, अपने को सुधार रहा है।(c) सर्वसाधारण के अर्थ में भी ‘आप’ का प्रयोग होता है। जैसे- आप भला तो जग भला, अपने से बड़ों का आदर करना उचित है।

(घ) अवधारण के अर्थ में कभी-कभी ‘आप’ के साथ ‘ही’ जोड़ा जाता है। जैसे- मैं आप ही चला आता था, वह काम आप ही हो गया। मैं वह काम ‘आप ही’ कर लूँगा।

(ड़) ‘आप’ के स्थान पर कभी-कभी ‘स्वंय’, ‘खुद’, ‘स्वत:’ आदि शब्दों का प्रयोग होता है। जैसे- गांधीजी स्वंय सत्यवादी थे और दूसरों को भी सत्य का उपदेश देते थे।, जो खुद नहीं करता उसे दूसरों को कहने का क्या अधिकार है?

संयुक्त सर्वनाम

कभी-कभी दो या दो से अधिक सर्वनाम इकट्ठे प्रयुक्त होते हैं, अथवा एक सर्वनाम पुनरुक्त रूप में आ जाते हैं। इसे संयुक्त सर्वनाम कहते हैं। रूस के हिंदी वैयाकरण डॉ. दीमशित्स ने इसकी खोज और नामकरण किया था। उन्हीं के शब्दों में, “संयुक्त सर्वनाम पृथक श्रेणी के सर्वनाम हैं। सर्वनाम के सब भेदों से इनकी भिन्नता इसलिए है, क्योंकि उनमें एक शब्द नहीं, बल्कि एक से अधिक शब्द होते हैं। संयुक्त सर्वनाम स्वतंत्र रूप से या संज्ञा-शब्दों के साथ भी प्रयुक्त होता है।”[7] जैसे- जो कोई, सब कोई, हर कोई, और कोई, कोई और, जो कुछ, सब कुछ, और कुछ, कुछ और, कोई एक, एक कोई, कोई भी, कुछ एक, कुछ भी, कोई-न-कोई, कुछ-न-कुछ, कुछ-कुछ, कोई-कोई इत्यादि।

सर्वनाम के रूपांतरण

सर्वनामों का रूपांतरण पुरुष, वचन और कारक की दृष्टि से होता है। इनमें लिंगभेद के कारण रूपांतरण नहीं होता। जैसे- (क) वह खाता है। (ख) वह खाती है।

इसलिए सर्वनाम शब्दों का स्त्रीलिंग और पुल्लिंग में एक ही रूप होता है। केवल संबंधकारक में कुछ एक सर्वनामों से लिंगभेद प्रगट होता है। जैसे- मेरा-मेरी, तेरा-तेरी, हमारा-हमारी, तुम्हारा-तुम्हारी।

संज्ञाओं के समान सर्वनाम के भी दो वचन होते हैं- एकवचन और बहुवचन। पुरुषवाचक और निश्चयवाचक सर्वनाम को छोड़ शेष सर्वनाम विभक्तिरहित बहुवचन में एकवचन के समान रहते हैं।

सर्वनाम में केवल सात कारक होते हैं, संबोधन कारक नहीं होता। कारकों की विभक्तियाँ लगने से सर्वनामों के रूप में विकृति आ जाती है। जैसे- मैं- मुझको, मुझे, मुझसे, मेरा

तुम-, तुम्हें, तुम्हारा  हमें, हमारा  उसने, उसको उसे, उससे, उसमें, उन्होंने, उनको  इसने, इसे, इससे, इन्होंने, इनको, इन्हें, इनसे यह- किसने, किसको, किसे कौन-

 

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